Home / ताजा खबरे / लाईट से नहीं दीयों से होगी इस वार की दीवाली रोशन

लाईट से नहीं दीयों से होगी इस वार की दीवाली रोशन

त्यौहारों का सीजन शुरू हो गया है ! त्यौहारों  में लोगो को दीवाली का बेसब्री से इंतज़ार रहता है ! इन दिनों लोग अपने घर को सजाने के लिए एक से एक सुंदर चीज़े  खरीदते है ! दीवाली में दीयो  का बहुत महत्व है पहले लोग अपने घरो को दीयो से सजाते थे लेकिन आजकल लोग बहुत कम दीयो का इस्तेमाल करते है ! इसकी जगह रंग -बिरंगी लाइटो ने ले ली है ! लेकिन अब इन लाइटो को टक्कर देने के लिए गोबर से बने दिए आगये है !

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग अगले महीने दिवाली के दौरान चीनी उत्पादों का मुकाबला करने के लिए, गाय के गोबर से बने 33 करोड़ पर्यावरण अनुकूल दीये के उत्पादन करने का लक्ष्य तय कर रहा है !

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया ने सोमवार को यह जानकारी दी ! 2019 में देश में स्वदेशी मवेशियों के संवर्धन और संरक्षण के लिए स्थापित किए गए इस आयोग ने आगामी त्योहार के दौरान गोबर आधारित उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है !

कथीरिया ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”चीन निर्मित दीया को खारिज करने का अभियान प्रधानमंत्री के स्वदेशी संकल्पना और स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा देगा !” उन्होंने कहा कि  इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए 15 से अधिक राज्य सहमत हुए हैं !

उन्होंने बताया  कि पावन नगरी अयोध्या में लगभग तीन लाख दीये  जलाए जाएंगे ! जबकि  एक लाख दीये उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जलाये जायेंगे ! उन्होंने बताया कि , ”विनिर्माण का काम शुरू हो गया है और हमारा लक्ष्य है कि दिवाली से पहले 33 करोड़ दीये बनाये जाये !” वर्तमान में भारत में प्रतिदिन लगभग 192 करोड़ किलो गोबर का उत्पादन होता है !

उन्होंने कहा कि गोबर आधारित उत्पादों की विशाल संभावनाएं मौजूद हैं ! अयोग ने कहा कि हालांकि यह सीधे तौर पर गोबर आधारित उत्पादों के उत्पादन में शामिल नहीं है, लेकिन यह व्यवसाय स्थापित करने को इच्छुक स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को प्रशिक्षण देने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं !

दीयों के अलावा, आयेग गोबर, गौमूत्र और दूध से बने अन्य उत्पादों जैसे कि एंटी-रेडिएशन चिप, पेपर वेट, गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों, अगरबत्ती, मोमबत्तियों और अन्य चीजों के उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं ! कथीरिया ने कहा कि इस पहल से गाय आश्रयों (गौशालाओं) को मदद मिलेगी, जो वर्तमान में कोविड-19 महामारी के कारण वित्तीय मुसीबत में हैं ! ये गौशालायें ग्रामीण भारत में नौकरी के अवसर पैदा करने के अलावा लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती हैं !

उन्होंने कहा, ”पूरे के पूरे रुख में बदलाव करने की जरुरत है तथा गाय आधारित कृषि और गाय आधारित उद्योग के बारे में लोकप्रिय धारणा को तत्काल दुरुस्त किये जाने की जरुरत है ताकि समाज का सामाजिक और आर्थिक कायाकल्प हो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों का जीवन बदले।” उन्होंने कहा कि किसानों, गौशाला संचालकों, उद्यमियों को इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए कई तरह की वेबिनार आयोजित किये जा रहे है !

यदि आपको हमारी ये जानकारी  पसंद आई हो तो लाईक, शेयर व् कमेन्ट जरुर करें ! रोजाना ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे पेज को फ़ॉलो जरुर करे ! 

About Megha

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *